जबलपुर। प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम की उत्पादकता में वृद्धि और तेजी लाने के लिए उठाए जा रहे विभिन्न कदमों के बारे में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से आज मंगलवार को होटल कल्चुरी में एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया । मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम द्वारा रेजिंग एंड एक्सलरेटिंग एमएसएमई परफार्मेंस (रेम्प) स्कीम के तहत आयोजित इस कार्यशाला में जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग के संयुक्त संचालक उद्योग एवं इन संभागों के जिलों के महाप्रबंधक जिला व्यापार और उद्योग केंद्र ने भाग लिया। कार्यशाला में रैम्प स्कीम के साथ लीन मैन्युफैक्चरिंग, जेड सर्टिफिकेशन और एक्सपोर्ट प्रमोशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्रों के महाप्रबंधकों को रैम्प स्कीम में सक्रिय भागीदारी एवं जिलों में योजना को लागू करने के प्रोत्साहित किया गया, ताकि प्रदेश को उद्यमिता विकास की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाने हेतु ठोस कदम उठाए जा सकें। कार्यशाला में संयुक्त संचालक रीवा एवं जबलपुर से निरंजन श्रीवास्तव एवं दिनेश कुमार वरखड़े ने कार्यशाला में भागीदारी की जाकर अपने विचार व्यक्त किए । राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद के सिद्धार्थ पाल ने लीन स्कीम के महत्व और उनकी प्रासंगिकता पर जानकारी प्रदान की ।
भारत सरकार के एमएसएमई डीएफओ इंदौर से निलेश त्रिवेदी एवं राजकुमार मोहानी ने एमएसएमई मंत्रालय भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं तथा रैम्प योजना के अंतर्गत लॉन्च की गई दो प्रमुख योजनाओं गिफ्ट एवं सर्क्यलर एकोनोमी पर अपने विचार प्रस्तुत किए ।मध्यप्रदेश में रैम्प के नोडल अधिकारी अनिल थागले ने इस अवसर पर रैम्प स्कीम के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस स्कीम का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश के एमएसएमई सेक्टर की उत्पादकता बढ़ाना और उनके प्रदर्शन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सशक्त बनाना है। इसके अतिरिक्त, ईवाई और फिक्की की टीम ने कार्यक्रम के आयोजन और समन्वय में सहयोग दिया। कार्यशाला के समापन पर उपस्थित एमएसएमई विभाग के अधिकारियों ने इस पहल से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार और सुझाव साझा किए, जिससे आने वाले समय में एमएसएमई सेक्टर को और मजबूत बनाने के मार्गदर्शन मिल सके।